मास्क्ड आधार की तकनीकी संरचना
मास्क्ड आधार भारतीय पहचान सत्यापन प्रणाली में गोपनीयता बढ़ाने वाला एक आधिकारिक रूप से स्वीकृत माध्यम है। यह डेटा न्यूनीकरण (Data Minimization) के सिद्धांत पर कार्य करता है: अर्थात् पहचान स्थापित करने के लिए केवल उतनी ही न्यूनतम जानकारी उजागर करना जितनी वास्तव में आवश्यक है।
मास्क्ड आधार का क्या मतलब होता है?
सरल शब्दों में, मास्क्ड आधार का मतलब यह है कि आपके 12 अंकों के विशिष्ट पहचान संख्या में से पहले 8 अंक काले कर दिए जाते हैं या उनकी जगह XXXX-XXXX लिखा होता है, और केवल अंतिम 4 अंक ही दिखाई देते हैं।
मास्क्ड आधार कार्ड का उदाहरण
| दस्तावेज़ घटक | सामान्य आधार | मास्क्ड आधार (उदाहरण) | सत्यापन कार्य |
|---|---|---|---|
| आधार संख्या | 4582 9103 6741 |
XXXX XXXX 6741 |
डेटाबेस के दुरुपयोग से सुरक्षा |
| पूरा नाम | दिखाई देता है | दिखाई देता है | बुकिंग या अनुबंध नाम से मिलान |
| फोटो | 200 DPI फोटो | 200 DPI फोटो | आमने-सामने चेहरे का मिलान |
| जन्म तिथि | दिन/माह/वर्ष | दिन/माह/वर्ष | आयु का सत्यापन |
| आवासीय पता | पूरा डाक पता | पूरा डाक पता | निवास प्रमाण |
| सिक्योर क्यूआर कोड | डिजिटल मैट्रिक्स | स्क्रैम्बल / धुंधला | स्कैनर डेटा चोरी से बचाव |
ऑफ़लाइन सत्यापन कैसे काम करता है?
जब आप ऑफ़लाइन सत्यापन (जैसे होटल चेक-इन, किराये का समझौता या ऑफिस विज़िटर रजिस्टर) के लिए अपना दस्तावेज़ प्रस्तुत करते हैं, तो संबंधित व्यक्ति UIDAI के सर्वर से कनेक्ट नहीं होता। इसके बजाय:
- फोटो का मिलान उपस्थित व्यक्ति के चेहरे से किया जाता है।
- नाम की पुष्टि आरक्षण या आवेदन से की जाती है।
- अंतिम 4 अंक रजिस्टर में रिकॉर्ड किए जाते हैं।
चूंकि इस प्रक्रिया के लिए पूरे 12 अंकों की आवश्यकता नहीं होती, इसलिए XXXX-XXXX-9012 रिकॉर्ड करना विनियामक आवश्यकताओं को पूरा करता है।