मास्क्ड आधार को नियंत्रित करने वाला कानूनी ढांचा
भारतीय नागरिकों के बीच अक्सर यह संदेह रहता है कि क्या होटल, मकान मालिक या निजी कंपनियां मास्क्ड आधार को स्वीकार करेंगी या नहीं। भारतीय कानून के अनुसार इसका उत्तर बिल्कुल स्पष्ट है: मास्क्ड आधार ऑफ़लाइन पहचान सत्यापन के लिए पूर्णतः वैध और कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त है।
UIDAI के तहत वैधानिक मान्यता
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने परिपत्र संख्या 10 (2018) और आधार अधिनियम, 2016 की धारा 8A (संशोधित) के माध्यम से मास्क्ड आधार का कानूनी मानक स्थापित किया है:
- समान कानूनी मूल्य: जनसांख्यिकीय विवरण (नाम, जन्म तिथि, लिंग और पता) सत्यापित करने के लिए मास्क्ड आधार का कानूनी मूल्य सामान्य आधार कार्ड के बिल्कुल समान है।
- सुरक्षित ऑफ़लाइन मानक: जब कोई संस्था बायोमेट्रिक e-KYC नहीं कर रही हो, तो मास्क्ड प्रति स्वीकार करना न केवल अनुमत है, बल्कि UIDAI द्वारा अनुशंसित मानक है।
- अवैध भंडारण पर रोक: आधार अधिनियम की धारा 29 के तहत निजी संस्थाओं को असुरक्षित डेटाबेस में पूर्ण 12-अंकीय आधार नंबर संग्रहीत करने की सख्त मनाही है।
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के केवाईसी मास्टर निर्देश
बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं के लिए, RBI ने अपने केवाईसी मास्टर निर्देश, 2016 (अपडेटेड) में स्पष्ट निर्देश दिया है:
“विनियमित संस्थाएं यह सुनिश्चित करेंगी कि जहां ग्राहक ऑफ़लाइन सत्यापन के लिए आधार नंबर वाला दस्तावेज़ जमा करता है, वहां ग्राहक आधार के पहले 8 अंकों को मास्क या ब्लैक आउट कर दे।”
यदि कोई ग्राहक भूलवश अनमास्क्ड प्रति जमा करता है, तो बैंक अधिकारियों को अपने रिकॉर्ड में स्कैन करने से पहले पहले 8 अंकों को ब्लैक आउट करना अनिवार्य है।
पूर्ण (अनमास्क्ड) आधार कहाँ अनिवार्य है?
कानूनी सटीकता बनाए रखने के लिए नागरिकों को उन परिस्थितियों की जानकारी होनी चाहिए जहां कानूनन पूर्ण आधार आवश्यक होता है:
- प्रत्यक्ष कर अनुपालन: आयकर अधिनियम की धारा 139AA के तहत पैन-आधार लिंकिंग और आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल करना।
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT): आधार अधिनियम की धारा 7 के तहत सरकारी सब्सिडी, छात्रवृत्ति और पेंशन प्राप्त करना।
- भविष्य निधि (EPFO): ईपीएफओ के माध्यम से पीएफ निकासी या खातों का विलय।