होटलों में अनमास्क्ड आधार साझा करने का जोखिम
हर रोज़ लाखों घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय यात्री भारत के होटलों में चेक-इन करते समय अपना आधार कार्ड सौंपते हैं। अधिकांश होटलों में रिसेप्शन स्टाफ किसी असुरक्षित प्रिंटर पर इसकी फोटोकॉपी बना लेता है।
ये फोटोकॉपी अक्सर खुली फाइलों, ड्रॉर या कंप्यूटर में बिना किसी सुरक्षा या एन्क्रिप्शन के पड़ी रहती हैं।
होटल फोटोकॉपी लीक से होने वाले नुकसान
- असुरक्षित भौतिक भंडारण: गेस्ट रजिस्टर और आईडी प्रतियों को वर्षों तक कबाड़ के कमरों में बिना किसी डेटा नष्ट नीति के रखा जाता है।
- लोन फ्रॉड का खतरा: साइबर अपराधी ऐसी होटल प्रतियों के बंडल खरीदकर डिजिटल लोन और फर्जी बैंक खाते खोलने के लिए दुरुपयोग करते हैं।
- क्यूआर कोड डेटा चोरी: होटल के स्कैनर में आधार का क्यूआर कोड साफ़ स्कैन हो जाता है, जिससे कोई भी व्यक्ति आपकी जन्मतिथि और पता चुरा सकता है।
होटल चेक-इन पर UIDAI का आधिकारिक रुख
UIDAI ने आधिकारिक सलाह में स्पष्ट कहा है:
“नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे मास्क्ड आधार का उपयोग करें जहाँ आधार नंबर के केवल अंतिम 4 अंक दिखाई देते हैं… होटल या सिनेमा हॉल जैसे निजी संगठनों को आधार की अनमास्क्ड प्रतियां एकत्र या बनाए रखने का कोई अधिकार नहीं है।”
होटल में चेक-इन करते समय:
- पहचान की पुष्टि के लिए मूल आधार केवल दिखाएं।
- रिसेप्शन पर
FOR HOTEL CHECK-IN ONLY — NOT VALID FOR BANKING — [तारीख]वॉटरमार्क वाली मास्क्ड आधार कॉपी ही जमा करें। - यदि स्टाफ मना करे, तो उन्हें बताएं कि UIDAI के नियमों के तहत मास्क्ड आधार कानूनी रूप से मान्य है।